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दस्तक......

ज़िन्दगी गुज़र रही थी ऐसी कि जैसी हम चाहते ना थे। हंस-बोल रहे थे हम, खा-पी भी रहे थे हम। मगर कुछ अंदर का डर जो बाहर भी दिख रहा था। और फिर हम इंतेज़ार करने लगे किसे ऐसे का जो हमारी मुश्किल को दूर कर दे। और फिर तुम्हारे आने की आहट सुनाई दी। और हम इन्तेज़ार करने लगे तुम्हारी दस्तक का। क्योंकि तुम्हारी आहट हमको मिल गयी थी की तुम आने वाले हो। पता नहीं क्यों तुम्हारा ख्याल आते ही एक खुशी एक उम्मीद मन में जाग जाती थी। 

ज़िन्दगी में बहुत सारी परेशानी थी मगर कुछ आसानी भी थी। ज़िन्दगी बहुत अच्छी तो नहीं मगर बुरी भी नहीं गुज़र रही थी। हम सब साथ रहे थे। मगर एक खालीपन था। 

और फिर तुम्हारी वह आहट। हम तुम्हें अपने पास बुलाना चाहते थे। हम तुम्हारे साथ रहना चाहते थे। हम जीना चाहते थे तुम्हारे साथ। मगर हम को इंतेज़ार करना था तुम्हारा। क्योंकि तुम को आने में कुछ वक्त था। और हमको उस वक्त का इंतेज़ार था जब तुम आओगे। 

हम तुम्हारा स्वागत बहुत धूमधाम और हर्सोल्लास के साथ करना चाहते थे। मगर हम डर रहे थे। उस अनहोनी से जो पीछे हमारे साथ हो चुकी थी। हमको वह वक्त अभी भी याद है जब हमने उसका स्वागत बहुत ही जोश और खुशी से किया था। हमें उम्मीद थी कि वह हमारा साथ निभायेगा। मगर वह हमारे सोच के खिलाफ निकला। वह वैसा नहीं था जैसा हम चाहते थे। उसने हमारी ज़िन्दगी के हर पन्नों को उलट-पुलट कर दिया। और हम चाहते हुए भी कुछ ना कर सके। और हमें ना चाहते हुए भी उसके साथ रहना पड़ा।

और फिर वह हमारी ज़िन्दगी से धीरे-धीरे दूर होने लगा। हमको भी अब उसकी चाहत ना थी कोई। इसलिए हमने उसकी दूरी को महसूस नहीं किया। क्योंकि हमें तो तुम्हारा इंतज़ार थे। और हम तुम्हारा इंतज़ार बड़ी ही शिद्दत से कर रहे थे। 

क्योंकि तुम्हारे आने की आहट हमको मिल गयी थी। और हम इंतेज़ार कर रहे थे। तुम्हारी दस्तक का। 

और फिर इंतेज़ार ख़त्म हो गया। क्योंकि आज तुम हमारे साथ हो। तुमने दस्तक दे दी है हमारी ज़िन्दगी में। और तुम्हारी इस दस्तक का हम दिल से स्वागत करते हैं। और हम चाहते हैं कि हमारा और तुम्हारा साथ खुशियों भरा हो। हम दोनो मिलकर ज़िन्दगी की एक नई इबारत लिखें। तुम हमें इतनी खुशी दो कि हम उन बुरे दिनों को भूल जाएं। जो कभी हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा था। 

हम भूल जाएं ज़िन्दगी के हर दुख हर परेशानी। अब हमारी ज़िन्दगी में कोई दुख कोई परेशानी ना रहे। 

अब रहें तो सिर्फ़ मुहब्बत खुशी और सुकून और साथ रहें हम और तुम।

ऐ 2021 तुम्हारे पीछे नाजाने कितने आये और चले गये साल। कोई हमारे साथ हमेशा नहीं रहा। मगर कहते हैं ना यादें बड़ी हसीन होती हैं। हर साल अपने पीछे कुछ अच्छी यादें, तो कुछ बुरे लम्हे, ज़िन्दगी के तजुर्बे और बहुत सारी सीख हमको दे जाते हैं।

 हमें यकीन है कि हम तुम साथ बहुत खुश रहेंगे। हम यह भी नहीं कहते कि तुम सदा हमारे साथ रहो। मगर हम चाहते हैं। तुम हमारे साथ जितने दिन भी रहो। हमें खुशी और सुकून दो। 



 


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